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स्वामी विवेकानंद से..

हिंद तरुणाई का ज्योत, लिए भुवनेश्वरी नंदन, 

परमहंस के सहज मार्ग, तुम्हें शत कोटि वंदन। 

विश्वपटल झूम उठा था जिनके भारत वर्णन से, 

विभोर है यह राष्ट्रविचार स्वामी विवेकानंद से।।


नवभारत नवनिर्माण के प्रणेता हैं जो, 

धर्म सभ्यता अध्यात्म के ज्ञेयता हैं जो। 

वाणी पर न्यौछावर ज्ञान सकल जग का,

शिकागो है साक्षी जिस विराट मेरु पग का।।

गर्व से कहो हम हिन्दू है, कहने वाले संत से, 

विभोर है यह राष्ट्रविचार पूज्य विवेकानंद से।। 


शून्य से प्रारंभ सृष्टि का जब भारत सपूत बोला था, 

जन क्रंदन के शोर से पुरा अमरीका डोला था।

बोध कराया विश्व को वसुधैव कुटुंबकम् संस्कृति का, 

सत्य चेतना, उदार, अहिंसा पूजित धर्म वृत्ति का। 

विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर अकेले निकल पड़े थे जो, 

तमस के बीच उजाला करने, स्वयं ही दीप बने थे जो, 

धर्म कर्म का मर्म बनें, जन सेवक सचिदानंद से, 

विभोर है यह राष्ट्रविचार पूज्य विवेकानंद से।। 


ध्येय जिनका अटल रहा, पुलकित भारत होता रहे, 

अमरत्व का दान कर, फिर विष स्वयं ही पीता रहे। 

जीवन महान है! जो जीवित हो परहित के लिए, 

हम करें अनुसरण उनका, निज देशहित के लिए। 

यह वसुधा हुई धन्य है, जिनके पावन चरण से, 

विभोर है यह राष्ट्रविचार पूज्य विवेकानंद से।। 

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