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क्या आप गए हैं यहां?? महादेव की पहली तपोभूमि है यह जगह ~ Rohit kr Thakur

 


वैसे तो पूरी दुनिया ही महादेव की है। जहां भी खोजेंगे हमारे महादेव मिल ही जाएंगे। लेकिन हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में महादेव का ऐसा भी एक मंदिर है जिसके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते। आम जीवन यापन से कोसों दूर पहाड़ों के ऊपर मेलिंग में स्थित है ये प्राचीन महादेव मंदिर। 


यहां दर्शन का जब आवास मिला तो यहां के पुजारी जी से बात करते हुए पता चला की मेलिंग में स्थित यह महादेव का सबसे प्राचीन मंदिर है, जो महादेव का तपोस्थल भी है। 


मान्यता के अनुसार, जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ में महादेव का अपमान करने पर, माता सती ने स्वयं को अग्नि में दाह किया था, तब महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए थे। तब महादेव ने अपने विकराल क्रोध में रौद्र रूप धारण किया था और माता सती के जलते शव को लेकर पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाया। 


काफी समय बाद जब देवताओ के बहुत मनाने पर भी महादेव का क्रोध शांत नहीं हुआ तब महादेव संसार से मोह भंग करके, वैराग्य (संसार से विरक्त) होकर सर्वप्रथम मेलिंग में ही तपस्या करने आए। महादेव कई वर्षों तक मेलिंग के इसी पर्वत पर तप में लीन रहे। 


कहा जाता है की महादेव के तपस्या के दौरान यहाँ कई स्वयंभू शिवलिंग की उत्पति हुई थी, जो की आज भी यहां उपस्थित है। आश्चर्य की बात यह है की जो शिवलिंग यहां देखने को मिलता है उसका पत्थर यहां दूर-दूर तक उपलब्ध नहीं है। 


मेलिंग का यह स्थान मणि माहेश से पहले का स्थान माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के तपस्या को भंग करके उन्हें मनाने के लिए माता गौरी यहां आई थी। यहां पर तपस्या भंग होने पर महादेव यहां से मणि महेश के चले गए। यहां तपस्या के दौरान पूरे 12 शिवलिंग तैयार हुए थे, 13 वें शिवलिंग बनने के क्रम में महादेव का ध्यान भंग हो गया जिस कारण वह शिवलिंग आज भी अधूरा है।


इसी कारणवश इस स्थान को महादेव का प्रथम तपोभूमि कहा जाता है। आगे से आप जब भी यहां आएं, या लेह-लद्दाख जाने की योजना बनाएं, तो रास्ते में इस पावन भूमि पर सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव अवश्य करें। 

हर हर महादेव 🔱🚩✌️

© काव्याराधी ~ kavyaradhii 


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