गुलाब का संदेश
आपने गुलाब को महसूस किया है कभी!! कभी करके देखिये, कितना कुछ कह जाती है..
जब वो कोंपल में होती है तभी से लोग उसे निहारने लगते हैं... इस फिराक में कि "जैसे ही वो अपने सौंदर्य के ओट पर होगी हम तोड़ लेंगे.."
हजार स्वार्थ भरी नज़रो के बीच यौवनत्व कि ओर बढ़ती, काँटों से घिरी गुलाब फिर भी मुस्कुराती है।
क्योंकि उसे विश्वास है कि ये कांटे जो उसके चारों ओर है, ये उसी की हीफाजत के लिए है! मनचलों से.. लफंगो से.. और कुपढ़ो से.. जो अनायास ही हाथ पाँव चलाते रहते हैं!!
हम भी तो अपने समाज कि बेटियों को गुलाब की संज्ञा देते हैं न! और यही संकट तो उनके साथ भी महसूस करते हैं!! इसलिए, जब कभी हम गुलाब को देखते हैं, वो हमें संदेश दे रही होती है की काँटों के बिना गुलाब की हीफाजात मुमकिन नहीं है।
और जब आप भी यह बात समझ लेंगे कि बुरे लोगों के लिए कड़वा स्वभाव, प्रकृति का ही नियम है! तो चेहरे पर एक संतोषप्रद मुस्कुराहट के साथ आपके भीतर भी भातृत्व साहस का संचार होगा।
अपने आस-पास पुलकित हो रही बगियों कि हीफाजत कीजिये! और मुस्कुराईये.. आपने गुलाब कि नजरों से गुलाब देखा है.. ❤😍

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