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कर्मवीर

 


मन में जिसके क्षणिक ना तम रहता हो,
यत्न से विचलित होने का ना दम भरता हो..


नित संघर्षों से वार्ता करना जिसका स्वभाव बन जाए, 
शिखर से अग्नि की बरसात जो आंख मूंद सह जाए। 


प्रश्न नियति से करना कभी स्वीकार नहीं जिसे, 
धर्म - कर्तव्य से बढ़कर द्वैज प्यार नहीं जिसे.. 


चंचल प्रभाव जिसका, जो तनिक सकुचाते नहीं, 
रख लालसा तुच्छ स्वप्न की जो दंभ सरसाते नहीं। 


जगती के कठिन प्रश्न से जो भय कभी ना खाते हैं
इस धरा पर वही बंधु! वीर, कर्मवीर कहलाते हैं।।

© काव्याराधी ✍🏻

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