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किसान दिवस क्या और क्यों? किसानों के लिए वर्तमान सरकार की क्या योजनाएं??


"किसान दिवस क्यों??"

किसान हमारे देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश के ग्रामीण समृद्धि के पीछे प्रमुख कारक किसान ही है। परंतु अन्य कार्यों की विशेषताओं के पीछे किसानों का कार्य छिप जाता है। या यूं कहें कि जो सम्मान उन्हें मिलना चाहिए वो नहीं मिल पाता है। किसानों के साथ न्याय करने में या उनको प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार निरंतर कई योजनाएं लाती है। परंतु भारत के पांचवे माननीय प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी ने किसानों के उत्थान के लिए जैसा अतुलनीय कार्य किया है वह अनुकरणीय है। हम सभी उनके जयंती को किसानों के लिए समर्पित कर किसान दिवस के रूप में मनाते हैं।

"किसान दिवस" मानने का उद्देश्य है, कि यह कृषि क्षेत्र की नवीनतम सीखों के साथ समाज के किसानों को सशक्त बनाने का विचार देता है। किसान दिवस आम लोगों को किसानों के सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों के बारे में शिक्षित करने का भी काम करता है। 

मा० चौधरी जी के परंपरा को बढ़ाते हुए वर्तमान में नरेंद्र मोदी सरकार ने भी सराहनीय प्रयास किया है। हमारी सरकार कई ऐसी योजनाओं को संचालित कर रही है जो कृषि और किसानों के लिए हितकारी साबित हुई है। 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

भाजपा सरकार ने इस योजना का शुरुआत किसानों को आर्थिक सहायता करने के लिए किया था। इस योजना के तहत आज भी देश के लाखों किसानों को प्रत्येक वर्ष तीन किश्तों में  ₹6,000 तक का आर्थिक सहयोग दिया जाता है।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना

अन्य कार्य क्षेत्रों में दिए जाने वाले रिटायरमेंट पेंशन की तरह किसानों को भी स्वाबलंबी बनाने हेतु श्री नरेंद्र मोदी जी ने किसान मानधन योजना प्रारंभ किया। इसके तहत 18 से 40 वर्ष के किसान अपना आवेदन कर सकते हैं। 60 वर्ष के बाद किसानों को सरकार प्रत्येक माह ₹3,000 की मासिक पेंशन देगी।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना

इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार किसानों को बैंकों से तीन साल तक मात्र 04% के सालाना ब्याज दर से लोन उपलब्ध करवाती है।

फसल बीमा योजना

देश के गरीब किसानों को किसी भी प्रकार के प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसलों के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से भाजपा सरकार ने फसल बीमा योजना का शुभारंभ किया। इस के तहत लाखों किसानों को फसल के नुकसान होने पर बीमा कवर मिलता है।

उ.प्र. ट्यूबवेल योजना

उत्तर प्रदेश में माननीय योगी जी ने किसानों की सुलभता को बढ़ाने के लिए राज्यभर के किसानों को बिना किसी राशि के ट्यूबवेल उपलब्ध करवाने का प्रशंसनीय कार्य किया है।

  • "कृषि शिक्षा के लिए मोदी सरकार की योजना"
इसके अलावा भी विभिन्न राज्यों में हमारी भाजपा सरकार ने किसानों को स्वाबलंबी, सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनों को चला रही है, जिससे लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा सरकार ICAR के साथ प्राकृतिक खेती की पढ़ाई एवं एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाओं पर कार्य कर रही है।

कोरोना जैसी महामारी से उबड़ते ही भारत ने रूस और यूक्रेन युद्ध के मध्य संकट से प्रभावित देशों के लिए संकट मोचन बनते हुए उन्हें खद्दान्न सप्लाई कर नरेंद्र मोदी सरकार ने एक मिसाल कायम की है। यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि खाद्यान्न का उत्पादन लगातार बढ़ाने के साथ ही कृषि का निर्यात भी बढ़ रहा है, जो लगभग 04 लाख करोड़ तक बढ़ गया है। एमएसपी पर रिकॉर्ड गेंहू की खरीद भी भाजपा सरकार में हुई है।

  • "किसानों के लिए सबसे अधिक बजट के साथ उत्पादन में भी बना रिकॉर्ड.."

पिछले 8 वर्षों में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का बजट आवंटन लगातार बढ़ा है। वर्तमान वित्त वर्ष में कृषि बजट (Agriculture Budget) का आवंटन लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये है। पिछले 8 वर्षों में कृषि संबंधी बजट आवंटन में लगभग 6 गुना तक की वृद्धि हुई है। कृषि क्षेत्र में हो रही विकास यात्रा यहीं पर समाप्त नहीं होती है, आवंटन के साथ-साथ रिकॉर्ड खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों का भी रिकॉर्ड उत्पादन सरकार के बजट आवंटन का सही दिशा में खर्च होने का प्रमाण है। वर्ष 2021-22 में तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार, लगभग 315 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन अनुमानित है, वहीं बागवानी क्षेत्र का उत्पादन भी 334 मिलियन टन अनुमानित है, जो अब तक का सर्वाधिक है।

  • "एमएसपी में रिकॉर्ड वृद्धि"

सरकार ने किसानों के जीविकोपार्जन के साथ-साथ उनकी बेहतर आय को ध्यान में रखते हुए खरीफ, रबी व अन्य वाणिज्यिक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में लगातार वृद्धि की है। इसी का परिणाम रहा है कि वर्ष 2013-14 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य जो 1310 रुपये प्रति क्विंटल था, वह 2021-22 में बढ़कर रु. 1940 प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। इसी प्रकार, वर्ष 2013-14 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1400 रु. प्रति क्विंटल था, जो अब 2015 रु. प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

हमारे देश किसानों के प्रति इस विराट सजगता को जागरूक करने के लिए स्व. चौधरी चरण सिंह जी को कोटि कोटि नमन एवं उनके जयंती को किसान दिवस के रूप में मानने का निर्णय लेने के लिए स्व. अटल बिहारी जी को भी सादर नमन। साथ ही पिछले आठ साल में कृषि क्षेत्र को समृद्ध करने के लिए किए गए चौतरफा प्रयास हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक आभार।

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