संस्मरण में त्योंथर ❤️
त्योंथर - यह नाम शायद कभी भूल ना पाऊं। जीवन के सबसे यादगार रहे ये बीस दिन जो त्योंथर में बीता। सोहागी पहाड़ के गोद में बसा यह सुंदर सा नगर काफी कुछ नया अनुभव सीखला गई। और सबसे प्रिये चीज जो इसे और ज्यादा खास बनाती है, वो है यहां की संस्कृति... 😍
यकीन मानिए, आदिवासी से बसा यह क्षेत्र त्योंथर, आज के दिखावटी और तथाकथित आधुनिक युग में भी अपने 50 वर्ष पीछे तक की संस्कृति की संवाहक बनी हुई है। आज भी यहां के गांवों में संध्या चौपाल लगता है। आज भी यहां हर द्वार के बाहर मानस की चौपाई लिखी हुई मिलती है। आज भी यहां की बहन-बेटियां शिक्षित/सफल/सक्षम होकर पर्दे में रहती है और आज भी यहां लोगों में वही पुराना सद्भाव और बंधुत्व भाव मिलता है। 👍
और यहां का अतिथि सत्कार.. आहाहा!!! हम कहानियों में अक्सर सुना करते थे कि मां शबरी ने अपने झूठे बेर खिलाकर प्रभु श्री राम का स्वागत किया था.. उस सुखद अनुभूति को अनुभव करने का भी सौभाग्य त्योंथर में मिला। जब हमलोग क्षेत्र भ्रमण के दौरान एक घर के समीप से गुजर रहे थे, तो एक आदिवासी माता जबरदस्ती अपने घर ले गईं, हमें खाट पर बिठा कर बिना किसी संकोच के कुछ पुरानी बासी बिस्कुट (Parle-G, Cream, Good day मिलाकर) और दालबूट (मिक्सचर) पड़ोस दीं..😀। उस बासी मिक्सचर का स्वाद जीवन भर स्मरण रहेगा, एक "आदिवासी ममत्व" के स्वाद के रूप में। यकीन मानिए, उस बिस्कुट और दालबुट को खाने मात्र से, सहसा मानस में उल्लेखित राम-शबरी का प्रसंग याद आ गया। ♥️
और एक विशेष परिचय रहा यहां के एक शख्सियत श्री रामाशंकर सिंह भईया के साथ। यूं तो अपने बिहार में कई नेताओं से मेरा परिचय है, लेकिन रामाशंकर भईया इकलौते ऐसे नेता हैं, जिनका पैर छूने के लिए मेरा सर और हाथ स्वतः झुक गया। मुझे जानने वाले लोग जानते हैं कि अमूमन मैं किसी के आगे झुकता नहीं..😁 लेकिन भईया को प्रणाम करने की ईच्छा दिल से हुई थी।
बहरहाल, भईया इसी सुंदर त्योंथर क्षेत्र के कांग्रेस पार्टी से विधायक उम्मीदवार हैं। इनके विचार और व्यवहार इतना शालीन और मिलनसार है कि क्या ही कहें! अपने से छोटों को कभी गलती से भी 'रे' या 'तुम' ना कहना, अपने सहयोगी कर्मीयों को कभी भी कर्मी महसूस ना होने देना, क्रोध का कोई शिकन चेहरे पर नहीं.. और भी ऐसी कई छोटी-छोटी बातें आपके व्यक्तित्व को बड़ा बनाती है। वास्तव में इनके जैसे नेताओं की राजनीति को आवश्यकता है। ऐसे सच्चे, ईमानदार और निष्ठावान नेता से मिलना मेरे लिए एक सुखद परिचय है। हम आपके उज्ज्वल एवं यशस्वी राजनैतिक भविष्य की कामना करते हैं भईया। 🥳
साथ ही साथ इस क्षेत्र में यह भी अनुभव हुआ की आखिर क्यों हमारे आदिवासी लोग धर्मांतरण का शिकार होते हैं। संघ विचारधारा का प्रबल शासन होने के बावजूद यहां के हिंदू आदिवासी असुरक्षित है, ब्राह्मणों और क्षत्रियों से परेशान है। वास्तव में संघ एवं विश्व हिंदू परिषद को यहां कार्य करने की आवश्यकता है। यहां हमारे लाखों-लाख आदिवासी परिजन अपनी संस्कृति को बचाने में प्रयासरत हैं।
यदि प्रभु ने चाहा और कभी जीवन में अवसर मिला तो इस क्षेत्र में अपना कुछ योगदान देने की प्रबल कामना है। ♥️
"प्रणाम त्योंथर 🙏🏻 हर हर महादेव 🔱"




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