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उत्तर रामायण अथवा रामचरितमानस का उत्तरकांड सही या गलत?


धर्म का ज्ञान होना अनिवार्य है, परंतु धर्मान्धता किसी के लिए भी गलत है।

अपने धर्म से संबंधित हर ज्ञान को अर्जित कीजिये! परंतु इस बात का भी ध्यान रहे कि मुगल काल एवं ब्रिटिश शासन के दौरान हमारे हिंदू धर्म शास्त्रों से अत्यधिक छेड़ छाड़ किया गया था। इसका प्रमाण समय समय पर कई शोधकर्ता भी देते रहे हैं।

उदाहरण स्वरूप वाल्मीकि द्वारा रचित पवित्र रामायण तथा "उत्तर रामायण" एवं तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के उत्तरकांड के संदर्भ कि विवेचना की जाए तो हमें पता चल सकता है कि किस प्रकार हिंदुओं के मूल चेतना पर प्रहार करने का प्रयास किया गया और हमने सहजता से उसे स्वीकार भी लिया।

एक अचंभित वाक्या है कि जिस रामायण में प्रारंभ से राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया जाता है! अचानक से उसके बाद उत्तर रामायण में उन्हें सत्ता लोलुप्त से अनैतिक परिभाषित किया जाता है! और वाल्मीकि द्वारा रचित पवित्र रामायण में कहीं भी "सीता परित्याग" का वर्णन ही नहीं है जो हमें उत्तर रामायण या रामचरितमानस के उत्तर कांड में मिलता है। 


उत्तर रामायण के माध्यम से जनमानस में शम्बूक वध और सीता परित्याग जैसे घटना का असत्य वर्णन कर सुनियोजित रूप से श्रीराम के चरित्रहनन का जो प्रयास हुआ है वो वास्तव में दुखद है। ऐसी कई मिथ्याएं जनमानस में फैलाई गयी है जिससे श्रीराम के उज्जवल चरित्र पर कलंक लगाया जा सके। आज अवश्यकता है कि हम उसकी विवेचना करें! 
साधारण सा चिंतन का विषय है कि जिस सीता के लिए.. 

∆ श्री राम वन-वन भटकते हुए रावन का वध कर देते हैं, वह राम कुछ लोगों के कहने पर माँ सीता का परित्याग कर सकते हैं क्या? 

∆ अपने भाई लक्ष्मण के मूर्छित होने पर भी विचलित ना होने वाले राम चंद लोगों के वाद-विवाद से सीता के पवित्रता पर भला विचलित हो सकते हैं क्या? 

∆ क्या राज्याभिषेक से कुछ क्षण पूर्व पिता के कहने पर वन की ओर प्रस्थान करने वाले राम, भला सत्ता लोलुप्त भी हो सकते हैं क्या? 

∆ वन गमन के दौरान जो राम शबरी के झूठे बेर खा लें, जिनका सबसे प्रिये मित्र केवट मल्लाह हो, उस राम को उत्तर रामायण में वैश्य और शुद्र जाती का विरोधी बतलाना तर्कसंगत है क्या? 


∆ विवाह के समय अग्नि के समक्ष सीता से जन्मों जन्मांत तक सुख दुख में साथ देने कि प्रतिज्ञा करने वाले राम गर्भावस्था में सीता को अकेले छोड़ सकते हैं क्या? 

∆ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित पवित्र रामायण में कहीं भी शंभुक वध का उल्लेख नहीं है परंतु "उत्तर रामायण" में इसका उल्लेख अचानक से आ जाता है? 

∆ उत्तर रामायण के अनुसार राम पर मदिरा, नृत्यशैली, अनैतिकता, पक्षपात जैसा लांक्षण लगाया गया है जो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित पवित्र रामायण में कहीं भी उल्लेखित नहीं है। क्या इसपर सवाल नहीं उठना चाहिए? 


इस प्रकार की कई तथ्यों को गलत तरीके से हमपर थोप कर हमारे धार्मिक भावनाओं को आहत करने का षड्यंत्र रचा गया, जिसे हमने बिना किसी विरोध बिना किसी प्रश्न के हमने स्वीकार लिया। आश्चर्य यह है कि आज भी हम उन्हीं गलत तथ्यों को सत्य मानकर सर्वत्र उसका चर्चा करते हैं और अपने ही धर्म को कलंकित करते हैं। 

अगर शम्बूक वध और सीता परित्याग जैसे मनगढंत प्रसंग सत्य होते तो क्या यह प्रसंग "गीताप्रेस" जैसे उत्कृष्ट प्रकाशन की पुस्तकों में बताया नहीं जाता? ऐसे कई प्रकाशन हैं जो रामचरितमानस के उत्तर कांड का कुछ भाग एवं "उत्तर रामायण" को छापते ही नहीं है। "उत्तर कांड" या "उत्तर रामायण" ना तो महर्षि वाल्मीकि की रचना है, और नाही ये कभी मूल रामायण का भाग था। इसीलिए सुनियोजित रूप से फैलाये जा रहे इस असत्य, पाखंड और षडयंत्र को समझना और इससे दूर रहना होगा। 


धर्म कभी भी व्यक्ति को गलत सीख नहीं देता है। व्यक्ति को सत्य, न्याय और नैतिकता का मार्ग सिखाने के लिए धर्म का एवं धार्मिक ग्रंथों का सहयोग लिया जाता है। इस परिस्थिति में कदाचित् किसी धर्म के किसी पुस्तक में कुछ अनैतिक चर्चा हो तो उसे खंडित कर उसका शुद्धि करना चाहिए। धर्म का ज्ञान रखना चाहिए, परंतु धर्मान्धता गलत है। 

और एक बात हमें विशेष रूप से समझना होगा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित मूल रामायण में केवल ६ कांड ही थे - बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड एवं युद्ध कांड। युद्ध कांड के अंत में रावण वध के पश्चात श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ ही महर्षि वाल्मीकि ने पवित्र रामायण का समापन कर दिया। 

अतः आवश्यकता है कि हम अपने धार्मिक ज्ञान कि विवेचना करें एवं उसमें वर्णित कुरीति को दूर करने का प्रयास करें। सही तथ्यों को सही तरीके से विश्लेषित करें और इसका प्रारंभ स्वयं से करें। 

जय श्री राम 🙏🏻🚩 



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