लाल चौक पर तीन निशान...
यह सिर्फ नारा ही नहीं! अपितु हर भारतीय के मन की व्यथित भावना थी जो हर उस पल छलक उठती थी, जब लाल चौक पर किसी नालायक द्वारा तिरंगा जलाया जाता था...
हमारे बीच के हजारों लोग विभिन्न माध्यमों से, इस अत्याचार के विरुद्ध कई आंदोलन का तमाचा लगा कर सरकार को ललकारने का साहस किया की वो श्रीनगर से लाल चौक तक लगाम लगाए...
परंतु बेशर्मी की सिंहासन पर पल्थी मार बैठे तत्कालीन कांग्रेस सरकार राजनीतिक तुष्टिकरण के चादर में आतंकवाद को दूधिया पनाह देने के लिए कभी अपनी छड़ी श्रीनगर की ओर नहीं घुमायी।
या यूं कहिए की गार्जियन रूपी कांग्रेस के नलायकपन से सर पर चढ़े श्रीनगर की गलियों से बच्चों का भविष्य AK47 कि तड़तड़ाहट से शुरू होकर विस्फोटक के गूंज पर खत्म होती थी।
ये वही सरकारें हैं जो फूल के बगियों में पानी के नाम पर ईंधन का छिड़काव कर उसे कड़े धूप के भरोसे छोड़ जनता को मुफ्तखोरी की आश्रय दे रही थी। हम भारतीयों का मन तब भी व्यथित हुआ था...
आज इस मनोरम दृश्य को देखकर जो राष्ट्रवाद को कोस रहे हैं उनके लिए कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है...चूंकि राष्ट्रवादियों को इस दृश्य में एक संघर्ष काल भी दिखाई देता है जो कई बलिदानों से सुसज्जित हैं।
हम आभार प्रकट करते हैं हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जिन्होंनें दृढ़ संकल्प से आज कश्मीर को 370 और 35A से मुक्त कर श्रीनगर के सर से मातम का साया खींच पुनः उसके क्यारियों में फूल के बीज लगाए हैं।
धन्य धन्य हे भारत! जय हिन्द!! 🇮🇳

लाजबाब👍👍👍👍👍
जवाब देंहटाएंWah
हटाएंधन्यवाद
हटाएंBhut axa
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंAtisundar
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएं