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परशुराम के वंशज ~


याद करो तुम अपना धर्म और वेद
कहाँ दिखाता कौन जाती विभेद?

जब वर्ण ने सबको अधिकारा था
सहर्ष तुमने भी तो स्वीकारा था... 

बाहु से क्षत्रिय तो तप ब्राम्हण का दिखलाते हैंं ;
तब परशुराम के वंशज हम भूमिहार कहलाते हैं।

हर मानव के भीतर में दोनों का भान जरूरी है ;
शोणित पान करे जो जग में वो अवतार जरूरी है

भीष्म - द्रोण को हमने ही दिव्य गंगा ज्ञान दिया ;
इक्कीस "हय" वंशों का पर हमने ही संहार किया। 

कब तक घात सहोगे खुद पर ;
कब तक आस करोगे बुद्ध पर?

अमिट इतिहास बचाना हो तो
सबको संमार्ग पर लाना हो तो

एक पात्र लेकर हमें फिर आगे बढ़ना होगा
फरसे वाले हाथ से नव इतिहास रचना होगा

राम भी हम परशुराम भी हम रावण के हम अहंकार है
हम ही शक्ति हम ही भक्ति हम ही जीवन के आधार है। 

धन्य धरा के हम संरक्षक स्वयं के ही सरकार है
पाशुराम के वंशज हैं हम, कहते सब भूमिहार है।।

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