हिंदू नव वर्ष आया है..
आज सुबह यह दृश्य मनोरम सा छाया है ,
उठो! देखो हे पार्थ! हिन्दू नववर्ष आया है।
चंहु ओर प्रतित होता मौसम मस्त रंगीन ,
प्रकृति भी हो रही नव उत्सव की ऋण।
हर मानव प्रसन्न , नक्षत्र विपत्त विहीन ,
हिन्दू नववर्ष में मग्न हो सब है लीन...
वसुंधरा ने भी आज स्वयं को सजाया है ;
उठो! देखो हे पार्थ हिन्दू नववर्ष आया है।।
सूर्य प्रातः बेला उठ लालिमा ओढ़कर आयी है ,
बदलते वक्त अस्त-रस्त समस्त भगवा छायी है।
शुभबेला में नवज्योत अंबर मन को भायी है ,
मिष्ठान्न भोग कर नवभेष में आर्यावर्त समायी है...
यह नव बेला ही नव संवत्सर हर्ष लाया है ,
उठो! देखो हे पार्थ! हिन्दू नववर्ष आया है।।
कहे बिहारी नववर्ष आप सभी का मंगलमय ,
हो संवत्सर ७८ से समस्त विपत्त का क्षय।
बढ़ते रहें रूके नहीं नाही किसी का भय हो ,
हर ओर माँ भारती के वत्स का ही जय हो..
राष्ट्रदेव के श्रीचरणों में जयमंगल गान करें ,
उठें और अपनी संस्कृति का सम्मान करें।।
नये संकल्पों के साथ नये वर्ष को दिव्यमान करें ,
ध्वज तिरंगा हो हर हाथ में भगवामय असमान करें।
गर्व से कहो हम हिन्दू है यह सनातनी मान भाया है ,
उठो! और देखो हे पार्थ! हिन्दू नववर्ष आया है।।
उठो! और देखो हे पार्थ! हिन्दू नववर्ष आया है।।

अति सुंदर !
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