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शीर्षक : मुझे याद करो... © काव्याराधी ✍🏻




लफ्ज़ है उल फहद , 
एक चहक बेधड़क। 
सुन मुझे महक मेरी , 
तुझसे है तुझ में ही।।
इन चांदनी सितारों में
उन हसरती श्रृंगारों में...
मुझे याद करो! 
मुझे प्यार करो!!

मै सागर तुम मोती , 
मै अंधा तुम ज्योति। 
मै धार तुम किनारा ,
मै आफत तु सहारा।। 
मैं जब भी आँखे मुंदती हूँ , 
तुझको ही तो ढूँढती हूँ...
सपनों की मैं प्रेयसी हूँ , 
मैं तेरे द्वार की देहरी हूँ।
तेरे दीप कि मैं बाती हूँ ;
तेरे गीत ही मैं गाती हूँ... 
मुझे याद करो! 
मुझे प्यार करो!! 

मैं अल्फाज हूँ तु राग है , 
मैं नदिया हूँ तु आग है...
मैं पतझड़ हूँ तु है बसंत , 
टूटे मन की बहती तरंग।। 
मैं बारिश जब भी तकती हूँ ;
मैं तेरे ओस तक बहती हूँ... 
अपने बिस्तर पर तुझको
भींगी पलको से नेहती हूँ..
मैं धड़कन हूँ मेरी रूह तु
मुझ में है बस तु ही तु...
मुझे याद करो! 
मुझे प्यार करो!! 

मै फ़ज़ीहत् हूँ तुम आदत मेरी , 
किताबी इश्क़ की इबादत मेरी।
सूखे धूल पर कोई बारिश हो ;
मेरे तपिश कि तुम ख्वाहिस हो..
खुद से टूटा हुआ तर्पण हूँ.. 
तुम प्रेम हो मै दर्शन हूँ।। 
उन चांदनी सितारों में
उन हसरती श्रृंगारों में...
मुझे याद करो! 
मुझे प्यार करो!!
मुझे प्यार करो!!

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