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वतन की डोर कलाई से लगाए रखना..


महराणा का वचन तुम सदियों तक बचाए रखना..
इसकी गुमान को भी तुम रेशम से सजाए रखना..
हम इस देश के रक्षक हैं यह देश हमारा बंधन है ;
वतन की एक डोर अपने कलाई से लगाए रखना।।

विजय तिलक यह शोभित मस्तक पर इठलाता है..
वीर के नत से प्राचीर हृदय से यशगान दुहराता है..
भूभाग कि परवाह नहीं पर यह भारत भूमि ना टूटे ,
प्राण के अंत संचार में भी भईया यह तिरंगा ना छुटे।
बहिना कि राखी का फ़र्ज़ तुम सदियों निभाए रखना
हर कतरे की लहू से इसकी अखंडता बचाए रखना..
वतन की एक डोर अपने कलाई से लगाए रखना।


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