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बोलो क्या होगा सरकार? (व्यंग्यात्मक)


मत देते हैं दान लेकर - और सवाल रहे हैं पूछ! 
युग नेता थे तेजस्वी पर - कहाँ  पे हो गयी चूक? 
EC गया खेल बिगाड़! बोलो क्या होगा सरकार? 
चच्चा हो गये बंटाधार! जय जय जय सिया राम।

गली चौराहे और नुक्कड़ पर पान खाते हैं इतराते ;
टेबल के नीचे से भईया आप संविधान है बिकवाते!!
पड़ गयी मुश्किल में रफ्तार बोलो क्या होगा सरकार? 
प्रशासन भी है अब लाचार! जय जय जय सिया राम।

चोर उचक्के भरे पड़े हैं करते रहते हैं मनचाही ;
मासूमों को लूट खा रहे है कैसी ये अफसरशाही! 
हैं बच्चे बूढ़े सब लाचार - बोलो क्या होगा सरकार? 
सिस्टम ही है भ्रस्टाचार! जय जय जय सिया राम।

सड़को पर गड्ढे दिखते - और गड्ढे मेें है शासन ;
गुंडागर्दी की कठपुतली है पुलिस और प्रशासन।
है बाकी कहाँ विकास! बोलो क्या होगा सरकार? 
सुरक्षा नर्क गया सिधार! जय जय जय सिया राम।

निश्चय सात किया जो उसका विवरण दियो बताये ;
घप नहीं किये हो चच्चा! - तो काहे रहे शरमाए? 
शिक्षक भी तो है नाराज बोलो क्या होगा सरकार?
है नहीं कहीं रोजगार! जय जय जय सिया राम।

सत्ता गला देती है घोंट - गरीबों के अरमानों की ;
काफिलों मे घूम रहे उन्हें चिंता नहीं किसानों की!
मरते खेतों में पालनहार! क्या होगा सरकार? 
ठप हो गये सब कारोबार बोलो जय जय जय श्री राम।

बेरोजगाड़ी बाढ़ बीमारी में सब है लटके भटके ;
और चरसी बाबू है चैैन पुतली दारू पर ही अटके!
युवा करते विधवा विलाप! बोलो क्या होगा सरकार? 
राज्य का हो गया बंटाधार! जय जय जय सिया राम।

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