बिहार का गौरव पर्व : छठ पूजा
बिहार की मान सम्मान मर्यादा पहचान सांस्कृतिक उत्थान व लोक आस्था के चार दिवसीय गौरवशाली महापर्व छठ पूजा की समस्त बिहारवासियों को अंतर्मन से आनंदित मंगलकामनाएं।
हमारे जीवन में छठ पर्व का महत्व सिर्फ एक बिहारी ही समझ सकता है। छठ पूजा की एक एक विधि हमारे साँसों मे बसती है। छठ घाठ पर डाला उठाते समय एक दूसरे का परस्पर सहयोग हमारी एकता व एहसासों को एक सूत्र में बांध जाती है। सांय अर्घ् से हमें संदेश दिया जाता है कि जिसका अस्त होने वाला हो उसका आदर भी करना चाहिए व उसके संघर्षो को सदैव स्मरण में रखना चाहिए। वहीं प्रात: अर्घ् हमें प्रेरित करता है - जो आगेे बढ़ कर समझ को दिशा देना चाहें हमसभी को करबध होकर उनका स्वागत करना चाहिये।
वर्षों से इसी परंपरा को निभाते हुए हम बिहारवासी सूर्य के अस्तांचल व उदयांचल काल में अर्घ चढाते हैं । छठ व्रत करने वाले दो दिनों का निर्जल उपवास रखते हैं व आठ - नौ घंटे पानी में खड़े रहकर सूर्य की उपासना करते हैं जिससे सभी में पर्व के प्रति श्रद्धा स्वत: बढ़ जाती है। और भी कई ऐसी विधि है जो छठ पूजा के प्रतिष्ठा की ओर लोगों को आकर्षित करता है ; जिसके महत्व को केवल एक बिहारी ही समझ सकता है। और वास्तव में यह सिर्फ पर्व नहीं अपितु गौरव भावना है हमारी।
॥जय छठी मैया॥

अतिसुन्दर
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